
क्लब का कॉरिडोर थोड़ा शांत था, लेकिन फिर भी म्यूजिक की धमक दूर से आ रही थी। वॉशरूम के अंदर की रोशनी मद्धम थी। Maya adjusted her hair and reapplied the lip gloss little bit. उसने मिरर में खुद को देखा, अपने लुक को परखा, लेकिन तभी पीछे से दरवाजा खुलने की आहट हुई। माया को लगा शायद कोई और लड़की होगी, पर अगले ही पल पीछे से एक भारी आवाज़ आई, "Hey beautiful!"
आवाज़ सुनते ही माया ने मिरर में रिफ्लेक्शन देखा। वॉशरूम के दरवाजे पर एक लड़का खड़ा था— Casual expensive clothes with arrogant smile. उसकी बॉडी लैंग्वेज में एक अजीब सी अकड़ थी। उसे देखते ही माया मुड़ी और बाहर जाने के लिए कदम बढ़ाए, पर उसने रास्ता रोकते हुए कहा, "Hi, are you alone?"
माया ने उसे एक cold लुक दिया और सपाट लहजे में बोला, "Excuse me, move."
उसकी बात सुनकर लड़के के चेहरे पर एक smirk तैर गई। वह टस से मस नहीं हुआ और बोला, "अरे, इतनी जल्दी क्या है? Party enjoy नहीं कर रही?"
उसकी बात पर माया ने उसे घूर कर देखा और दो टूक कहा, "I don't entertain strangers."
इस पर सामने खड़े लड़के ने हाथ आगे बढ़ाकर अपना परिचय दिया, "Hi, Rahul Ahuja." पर माया ने हाथ नहीं मिलाया। उसने उसके बढ़े हुए हाथ की तरफ देख कर बेरुखी से कहा, "Not interested."
राहुल ने एक हल्की, कड़वी हँसी छोड़ी और कहा, "एटीट्यूड तो काफी है।"
"Self-respect," माया ने तुरंत उसे करेक्ट किया।
वह थोड़ा और माया के करीब आया। अब माया को उससे विस्की की बहुत तेज स्मेल आ रही थी। वह अपनी सीमाएं लांघ रहा था। उसने पास आकर कहा, "Come on yaar, क्लब में आई हो, थोड़ा friendly तो हो सकती हो।"
लेकिन माया टस से मस नहीं हुई। उसने एक भी कदम पीछे नहीं हटाया और सीधे उसकी आँखों में देखकर बोला, "Friendly होना और cheap होना, दो अलग-अलग बातें हैं।"
माया के चेहरे पर इरिटेशन साफ़ नज़र आ रही थी। पर राहुल पर इसका कोई असर नहीं हुआ, वह उसे देखते हुए बोला, "तुम जैसी लड़कियाँ ना पहले बहुत नखरे करती हैं।"
उसकी बातें सुनकर माया की आँखें एकदम ठंडी पड़ गईं। उसने धीमी पर सख्त आवाज़ में कहा, "और तुम जैसे लड़के ना consent का मतलब नहीं समझते।"
कॉरिडोर में एक पल के लिए भारी खामोशी छा गई। फिर माया ने अपनी आवाज़ को और सख्त किया, "Now move."
राहुल ने हटने के बजाय अपने हाथ से दीवार ब्लॉक कर दी और करीब झुककर कहा, "रिलैक्स, इतनी अकड़ किस बात की?"
उसी पल माया का लहजा बदल गया। उसकी आवाज़ अब controlled, sharp but deadly calm थी। उसने सीधे उसके चेहरे की ओर देखते हुए कहा, "राहुल आहूजा, अगर एक और स्टेप मेरे personal space में लिया, तो यह क्लब तुम्हारे लिए last public place होगा जहाँ तुम खड़े होगे।"
राहुल ने दिखावे के लिए अपने हाथ नीचे किए और मज़ाक उड़ाते हुए बोला, "अरे, मैं तो डर गया!" वह ज़ोर से हँसा और फिर उसकी आँखों में देख कर पूछा, "थ्रेट दे रही हो?"
"माया नहीं, warning दे रही हूँ," उसने आगे कहा, "पता है तुम्हारी प्रॉब्लम क्या है? तुम जैसों को लगता है कि हर लड़की सिर्फ तुम्हें impress करने के लिए बनी है, पर मैं वो नहीं हूँ।"
माया की इस बेबाकी ने राहुल के ईगो को चोट पहुँचाई। उसके जबड़े एकदम कस गए। उसने माया को हिकारत से देखा और नीचता पर उतर आया, "तुम जैसी लड़कियों को ना थोड़ा टाइम लगता है, पर फिर सीधी हो जाती हो... यहाँ तक कि लोगों के बिस्तर पर भी जाने को मान—"
वह अपना वाक्य पूरा भी नहीं कर पाया था कि एक ज़ोरदार थप्पड़ की गूँज वॉशरूम की दीवारों से टकराई।
थप्पड़ इतना तेज़ था कि राहुल का चेहरा एक तरफ घूम गया। गाल पर जलन महसूस होते ही उसकी आँखें, जो पहले नशे में थीं, अब गुस्से के कारण एकदम सुर्ख लाल हो गई थीं। उसने तिलमिलाकर अपना चेहरा उठाया और माया की ओर देखा।
उसने दहाड़ते हुए कहा, "How dare you?"
पर उसकी बात बीच में ही काटते हुए माया शेरनी की तरह उस पर झपटी, "Don't you fucking dare to talk to me like that!"
माया ने उसकी आँखों में अपनी नफरत और ताकत झोंक दी और गर्व से कहा, "माया सिंघानिया नाम है मेरा। मैं टूट सकती हूँ पर झुक नहीं सकती।"
इससे पहले कि राहुल कुछ समझ पाता, माया ने उसे पूरे ज़ोर से धक्का दिया, "Now move!"
उसकी आवाज़ की कड़क और उस धक्के के असर से राहुल दरवाजे से थोड़ा साइड हट गया। माया ने एक पल भी ज़ाया नहीं किया और बिना पीछे मुड़कर देखे, पूरे स्वाभिमान के साथ वहाँ से बाहर निकल गई।
Corridor में चलते हुए उसका दिल थोड़ा तेज़ धड़क रहा था।
लेकिन चेहरे पर calm expression था।वो डरती नहीं थी।
लेकिन वो बेवकूफ भी नहीं थी।
उसने phone निकाला और Palak को call किया।
"Where are you?”
“Dance floor! Kya hua?”
"Come outside. Now.”
उधर वॉशरूम के सन्नाटे में, राहुल आईने में अपने लाल होते गाल को देख रहा था। थप्पड़ की जलन अब उसके दिमाग तक पहुँच चुकी थी। उसकी 'ईगो' को इतनी गहरी चोट पहली बार लगी थी। उसने गुस्से में अपने दाँत पीसे और आईने में खुद के अक्स को घूरते हुए फुसफुसाया।
"बहुत अकड़ है ना तुममें..." उसकी आवाज़ धीमी थी, पर उसमें ज़हर भरा था। "अगर मैंने तुम्हारी ये अकड़ नहीं निकाली... तो मेरा नाम भी राहुल आहूजा नहीं।" उसकी आँखों में घायल अहंकार का काला साया साफ झलक रहा था।
क्लब के बाहर की ठंडी हवा ने माया को थोड़ी राहत दी। तभी पलक बदहवास सी भागती हुई बाहर आई।
"क्या हुआ माया? तू अचानक ऐसे बाहर क्यों बुला रही है?" पलक ने गौर से माया के चेहरे को देखा। "Everything okay?"
"Yeah," माया ने छोटे से जवाब में बात खत्म करनी चाही।
"पक्का? तू कुछ छुपा रही है," पलक ने ज़ोर देते हुए पूछा।
माया ने एक गहरी सांस ली और शांति से कहा, "Some men don’t understand basic decency. " बस याद दिलाना पड़ा।
पलक का चेहरा गुस्से से तमतमा उठा जब उसने माया की आंखों में छिपी कहानी को पढ़ा। "किसने बदतमीजी की? कौन था वो?"
"Doesn't matter," माया ने संक्षेप में उसे पूरी बात बताई।
सुनते ही पलक का पारा चढ़ गया, "उसकी हिम्मत कैसे हुई! मैं अभी अंदर जाकर उसे सबक सिखाती हूँ—"
"Relax," माया ने उसका हाथ पकड़कर उसे रोका। उसकी आवाज़ में एक अलग ही सुकून था। "मैं उसे हैंडल कर सकती हूँ और मैंने कर लिया है।"
"तू श्योर है?" पलक ने चिंता से पूछा।
"Always," माया ने हल्का सा मुस्कुराते हुए कहा, पर उसकी आँखों में अभी भी वही 'माया सिंघानिया' वाली चमक थी।
उसने एक लंबी और गहरी सांस ली, जैसे उस माहौल की कड़वाहट को वहीं छोड़ देना चाहती हो। "Let’s go home."
इतना बोल वो दोनों कार में बैठे क्लब से निकल जाती हैं।
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